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चुंबक और चुंबकत्व | Magnet and Magnetism

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चुंबक और चुंबकत्व (Magnet and Magnetism)

 
चुंबकत्व जो लोहे या स्टील के छोटे-छोटे टुकड़े को अपनी ओर आकर्षित करता है, चुंबक (Magnet) कहलाता है और इस पदार्थ का वह गुण जिस से वह लोहे, स्टील के टुकड़े को अपनी ओर आकर्षित करता है चुंबकत्व (Magnetism) कहलाता है। चुंबक प्रकृति में खनिज पदार्थों के रूप में प्राप्त किया जाता है जिसे मैग्नेटाइट कहते हैं ।
           वैसे तो प्राकृतिक चुंबक (Natural Magnet) का कोई व्यवहारिक प्रयोग नहीं है। क्योंकि इसका चुंबकत्व (Magnetism) बहुत ही कम होता है। इसलिए आधुनिक युक्तियों में प्राकृतिक चुंबक (Natural Magnet) का प्रयोग नहीं किया जाता है। आधुनिक युक्तियों में जिस चुंबक (Magnet)  का प्रयोग किया जाता है ,वह कृत्रिम होता है और यह लोहे, स्टील और चुंबक (Magnet)  के मिश्रण से बना होता है।
           लगभग 2000 वर्ष पहले मैग्नीशिया नामक स्थान पर गहरे काले भूरे पत्थर के रूप में एक पदार्थ प्राप्त हुआ ।जिसमें लोहे के छोटे-छोटे कणों को अपनी ओर आकर्षित (Attract) करने का गुण था ।इसलिए मैग्नीशिया स्थान के नाम पर ही इस धातु का नाम मैग्नेटाइट रखा गया। बाद में इसी धातु को चुंबक (Magnet)  व उसके आकर्षण के गुण को चुंबकत्व (Magnetism) कहा जाने लगा। यदि किसी स्थाई या प्राकृतिक चुंबक (Natural Magnet) को बीच में धागे से बांधकर लटका दिया जाए तो वह सदैव एक निश्चित दिशा में आकर रुक जाता है। इस अवस्था में सदैव उसका एक सिरा उत्तर दिशा में तथा दूसरा  दक्षिण दिशा में होता है। जो सिर उत्तर दिशा में होता है, उसे उत्तरी ध्रुव (North Pole) तथा जो सिरा दक्षिण दिशा में होता है ,उसे दक्षिणी ध्रुव (South Pole) कहते हैं। जैसा कि चित्र में दिखाया गया है।
 चुंबक (Magnet) चुंबक में दिशा सूचक (Direction Indicator) का भी गुण होता है ।इसलिए इसका प्रयोग दिशा सूचक के रूप में भी किया जाता है ।प्राचीन काल में नाविकों के द्वारा दिशा ज्ञात करने के लिए प्रयोग किया जाता था ।आजकल दिशा को ज्ञात करने के लिए जो आधुनिक युक्तियां बनाई गई हैं। उनमें स्थाई चुंबक (Permanent Magnet) का प्रयोग किया जाता है ।
पृथ्वी चुंबक (Earth Magnet)

 

हमारी पृथ्वी भी स्वयं एक चुंबक (Magnet) ही है। चित्र में पृथ्वी को एक बहुत बड़े चुंबक (Magnet)  के रूप में दिखाया गया है। पृथ्वी के चुंबक का दक्षिणी ध्रुव पृथ्वी के भौगोलिक उत्तर के समीप तथा पृथ्वी के चुंबक का उत्तरी ध्रुव पृथ्वी के भौगोलिक दक्षिण के समीप होता है। पृथ्वी चुंबक (Earth Magnet) के ध्रुव कभी भी पृथ्वी के भौगोलिक ध्रुव पर नहीं हो सकते ।चित्र में दिखाई देने वाली चुंबकीय बल रेखाएं  (Magnetic Line of Force)  पृथ्वी चुंबक के या किसी भी चुंबक (Magnet)  के उत्तरी ध्रुव से निकलती हैं और दक्षिणी ध्रुव की ओर चले जाते हैं ।यहां पर ध्यान देने वाली बात यह है कि चुंबकीय बल रेखाएं  (Magnetic Line of Force)  किसी भी चुंबक के उत्तरी ध्रुव पर ना ही उत्पन्न होते हैं और ना ही दक्षिणी ध्रुव पर समाप्त हो जाती हैं ।बल्कि यह उत्तरी ध्रुव से होते हुए दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचती हैं और चुंबक (Magnet)  के अंदर से होते हुए यह दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव की ओर जातीं हैं और इस प्रकार से यह चुंबकीय बल रेखाएं (Magnetic Line of Force) एक पाश (Loop)  का निर्माण करती हैं।

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