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भौतिक राशियाँ | Physical Quantity in Hindi

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भौतिक राशियाँ 

अरस्तु के अनुसार ,जिसमे प्रकृति के नियमो  तथा प्राकृतिक घटनाओ का अध्यन किया जाता है ,उसे भौतिक नाम दिया गया  है | परिभाषाविज्ञान की वह शाखा जिसमें द्रव्य तथा उर्जा एवं उनकी परस्पर क्रियाओ का अध्ययन किया जाता है ,भौतिक विज्ञान कहलाता है “

भौतिक राशि – वैसी राशि जिसे किसी यन्त्र की सहायता से मापा जा सके, उसे  भौतिक राशि (Physical Quantity) कहते हैं | जैसे- लम्बाई , द्रब्यमान ,समय इत्यादि | कुछ ऐसी भौतिक राशियाँहैं जिनका मापन नहीं किया जा सकता है , केवल उनका परिवर्तन) ही ज्ञात किया जा सकता है| जैसे- विभव(potential ) तथा एन्ट्रापी (entropy ),इनका केवल परिवर्तन ज्ञात किया जा सकता है जैसे विभव का परिवर्तन (विभवान्तर ) और एन्ट्रापी में परिवर्तन |
किसी दी गयी भौतिक राशि (Physical Quantity) के परिमाण को संख्या में व्यक्त करने को ही मापन कहते है |मापन के लिए दो चीजो की आवश्यकता  होती है ,1.मात्रक 2.आंकिक मान
किसी भौतिक राशि का आंकिक  मान उसके मात्रक के व्युत्क्रमानुपाती होता है अर्थात किसी भौतिक राशि (Physical Quantity) के मापन का मान जितना बड़ा होगा उस राशि का मात्रक उतना छोटा होगा |

मात्रकों की पद्धति  

1.सेमी–ग्राम-सेकेंड पद्धति (C.G.S SYSTEM )-इस पद्धति में लम्बाई ,द्रव्यमान और समय का मात्रक क्रमशः सेमी ,ग्राम तथा सेकंड होता है |
2.फुट- पाउंड- सेकंड पद्धति (F. P. S. SYSTEM ) –इस  पद्धति में लम्बाई ,द्रव्यमान और समय का मात्रक क्रमशः फुट ,पाउंड और सेकंड  है |
3.मीटर किग्रा सेकंड पद्धति (M K S SYSTEM ) – इस  पद्धति में लम्बाई ,द्रव्यमान और समय का मात्रक क्रमशः .मीटर, किग्रा और सेकंड है
उपर की तीनो पद्धतियां पहले प्रचलित थी जो की मूल मात्रको के नाम पर थी परन्तु सन 1960 ई .वी. में मापतौल समिति ने एक नई पद्धति स्थापित की जो की M K S का विस्तार थी जो अन्तराष्ट्रीय मात्रक पद्धति या S I SYSTEM कहलाई |उस समय सात मूल मात्रको तथा दो पूरक मात्रको का निर्धारण किया गया |
SI प्रणाली के प्रयोग की सावधानियाँ –
इस प्रणाली में प्रयोग किये जाने वाले मात्रको का प्रारम्भ अंग्रेजी के बड़े अक्षरों से नही करना चाहिए भले ही वो मात्रक किसी वैज्ञानिक के नाम पर हो ; जैसे –coulamb  (Coulamb नहीं ) joul (Joul नहीं ) आदि| वैज्ञानिक नाम वाले मात्रको के लिए प्रतिक के रूप में अंग्रेजी के बड़े अक्षरों,जैसे जूल के लिए J ,कूलाम के लिए C ,केल्विन  के लिए K का प्रयोग कर सकते है  परन्तु सेकंड के लिए s(S नहीं) ,मीटर के लिए m(M नहीं ) का प्रयोग करते हैं ,इन प्रतीकों  को कभी बहुवचन में(15 m को 15 msमें ) न लिखे और इनके बाद कोई विराम चिन्ह भी न लगाये |
भौतिक राशियाँ दो प्रकार की होती है |

पहली मूल राशि तथा दूसरी व्युत्पन्न राशि ,

जो राशि किसी अन्य राशि पर निर्भर नहीं करती अर्थात जिसे व्यक्त करने के लिए किसी दूसरी राशि की आवश्यकता नहीं होती उसे मूल राशि तथा इनके लिए प्रयोग किये गये मात्रको को मूल मात्रककहते है जैसे –लम्बाई ,द्रव्यमान और समय जिसका मात्रक मीटर ,किलोग्राम और सेकंड है |

दो या दो से अधिक मूल राशियों का प्रयोग कर बनी राशि व्युत्पन्न राशि कहलाती है  तथा इनके मात्रक को व्युत्पन्न मात्रककहते है जैसे वेग ,दाब आदि जिनके मात्रक क्रमशः मी/से. ,न्यूटन /मी हैं |

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