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Construction Of DC Generator in Hindi

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Construction Of  DC Machine

इस अध्याय में हम सब Construction Of DC generator के बजाय Construction Of DC Machine का अध्ययन करेंगे जोकि डीसी जनरेटर और डीसी मोटर दोनों के लिए समान होगा, क्योंकि डीसी जनरेटर और डीसी मोटर दोनों की संरचना समान होती है| जब इन मशीनों का निर्माण किया जाता है तो कर्मचारी यह नहीं जानते हैं कि यह डीसी मोटर है या डीसी जनरेटर है| अतः किसी भी डीसी जनरेटर को इसके संरचना में बिना किसी परिवर्तन के मोटर की तरह तथा डीसी मोटर को डीसी जनरेटर की तरह प्रयोग किया जा सकता है|Construction Of DC Generator in Hindi

डीसी मशीन की संरचना को मुख्यतः दो भागों में विभाजित किया गया है|
1.) स्थैतिक भाग (Stationary Parts)

डीसी मशीन के वे भाग जोकि मशीन के चलने की अवस्था में भी स्थिर रहते हैं| मशीन का यह भाग चुंबकीय क्षेत्र तंत्र कहलाता है जोकि चुंबकीय क्षेत्र के उत्पन्न करने तथा इन चुंबकीय क्षेत्रों के संवाहक का कार्य करता है| चुंबकीय क्षेत्र तंत्र के अंतर्गत निम्नलिखित भाग आते हैं| उन सभी भागों का अध्ययन हम नीचे विस्तार से करेंगे|

योक (Yoke)

डीसी मशीन के बाहरी खोखले बेलनाकार आवरण को योक कहते हैं जो कि पूरे मशीन को पूर्णतया ढका रहता है|योक पर ही poles और inter-poles स्थापित रहते हैं|

  • छोटे आकार की डीसी मशीन का योक, कास्ट आयरन (cast iron) का बना होता है जबकि बड़ी मशीनों में यह कास्ट स्टील या रोल्ड स्टील (cast steel or rolled steel) का होता है|

योक का मुख्य कार्य निम्नलिखित है:-

  • यह यांत्रिक आधार की तरह कार्य करता है क्योंकि यह डीसी मशीन के कुछ भाग जैसे poles और inter-poles आदि  को आधार प्रदान करता है |
  • योक मशीन को धूल, नमी और बाहरी चोट आदि से यांत्रिक  सुरक्षा प्रदान करता है|
  • मशीन में उत्पन्न होने वाले चुंबकीय क्षेत्रों के लिए यह एक अच्छे वाहक के रूप में कार्य करता है|

ध्रुव  (Pole & Pole core)

  • किसी डीसी मशीन में Pole का प्रयोग मुख्य चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करने के लिए किया जाता है|
  • यह डीसी मशीन के योक पर वेल्डिंग करके या फिर बोल्ट की सहायता से स्थापित किया गया रहता है|
  • Pole एक विद्युतचुंबक होता है जिस पर मुख्य चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करने के लिए बाइंडिंग की गई होती है |
  • डीसी मशीन के विद्युतचुंबक अर्थात Pole को उत्तेजित करने के लिए किसी बाहरी डीसी स्रोत जैसे-बैटरी आदि से सप्लाई दी जाती है जिससे Pole चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करने लगता है|
  • Pole कास्ट आयरन या कास्ट स्टील के पतले-पतले लैमिनेशंस का बना होता है|
  • Pole को बनाने के लिए पतले-पतले लैमिनेशन का प्रयोग इसलिए करते हैं ताकि eddy currents से होने वाले power lose को कम किया जा सके|

ध्रुव नाल (Pole shoes)

डीसी मशीन के ध्रुव के आगे की सतह कुछ मुड़ी होती है जिसे ध्रुव नाल कहते हैं|

  • इसके अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल ध्रुव के क्षेत्रफल की अपेक्षा अधिक होता है|
  • ध्रुव नाल का मुख्य कार्य ध्रुव पर की बाइंडिंग को उसके स्थान पर व्यवस्थित रखना तथा ध्रुव द्वारा उत्पन्न किए जाने वाले चुंबकीय क्षेत्र को समान रूप से आर्मेचर पर प्रसारित करना होता है|

 

क्षेत्र बाइंडिंग (Field winding) 

मुख्य चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करने के लिए डीसी मशीन के ध्रुव पर की जाने वाली बाइंडिंग को field windings कहते हैं|

  • जब field windings को
  •  किसी बाहरी डीसी स्रोत द्वारा विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है तो यह चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है|
  • प्रत्येक ध्रुवों की field windings एक दूसरे से श्रेणी क्रम में इस प्रकार से जूड़ी रहती हैं कि जब इन्हें सप्लाई दी जाती है तो इनके ध्रुव क्रमागत रूप से उत्तरी ध्रुव तथा दक्षिणी ध्रुव का निर्माण करते हैं|
  • ध्रुव पर field windings करने के लिए सामान्यतः कॉपर के चलक का प्रयोग करते हैं|

2.) घूर्णी भाग (Rotating Parts):-

यह डीसी मशीन का वह भाग होता है जो की मशीन को चालू कर देने  पर घूमने लगता है|

 आर्मेचर (Armature)

आर्मेचर,किसी डीसी मशीन का वह हिस्सा होता है जोकि मशीन के ध्रुव द्वारा उत्पन्न की गई चुंबकीय क्षेत्रों में घूमता है|

  • यह बेलनाकार होता है और मशीन के शाफ्ट पर स्थापित रहता है|
  •  इसका निर्माण सिलिकॉन स्टील के वृत्ताकार डिस्क के लेमिनेशनों के द्वारा किया जाता है|
  •  इसकी परिधि पर बहुत सारे खांचे बने होते हैं जिसमें आर्मेचर वाइंडिंग को स्थापित किए जाता  हैं|
  •  इसपर शीतलन के उद्देश्य से कुछ वायु छिद्र होते हैं|

आर्मेचर वाइंडिंग (Armature winding)

आर्मेचर वाइंडिंग एक ऐसा स्थान है जहां पर यांत्रिक ऊर्जा का रूपांतरण विद्युत ऊर्जा में होता है |

  • यह  वाइंडिंग आर्मेचर की परिधि पर बने खांचो में स्थापित किया जाता है|
  • इस वाइंडिंग के लिए प्रयोग किए जाने वाला चालक सामान्यता कॉपर का होता है|
  • जब आर्मेचर को किसी प्राथमिक चालक के द्वारा चुंबकीय क्षेत्र में घुमाया जाता है तो आर्मेचर वाइंडिंग में विद्युत वाहक बल प्रेरित हो जाता है|

आर्मेचर पर बाइंडिंग निम्नलिखित दो प्रकार से की जाती है-

  1.  lap winding
  2. wave winding

 

कम्यूटेटर (Commutator)

डीसी जनेटर में कमयुटेटर प्रेरित प्रत्यावर्ती विद्युत धारा को एकदिशीय धारा में परिवर्तित करके ब्रूस के माध्यम से वाह्य परिपथ को पहुंचाता है जबकि  डीसी मोटर में कमयुटेटर प्रत्यावर्ती बल आघूर्ण को उत्पन्न होने वाले एकदिशीय बल आघूर्ण में परिवर्तित कर देता है| कमयुटेटर के इसी गुण के कारण ही इसे mechanical rectifier कहते हैं |

  • यह बेलनाकार होता है और आर्मेचर के साथ साथ ही घूमता है|
  • कमयुटेटर, कॉपर के छड़ या segments से बना होता है|ये छड़े या segments को एक दूसरे से माइका की परत के द्वारा विद्युतरोधीत होती  हैं|
  • इन छड़ों या segments की संख्या आर्मेचर कुंडली (armature coils) की संख्या के बराबर होती है और  प्रत्येक segments से  एक आर्मेचर कुंडली जुड़ी होती है|

 ब्रश (Brush)

ब्रश आर्मेचर वाइंडिंग से प्राप्त होने वाली विद्युत धारा को संग्रहित करके वाह्य परिपथ को प्रदान करता है या फिर वाह्य परिपथ से प्राप्त होने वाली विद्युत धारा को आर्मेचर वाइंडिंग तब पहुंचाता है|

  • यह कमयुटेटर पर स्थापित रहता है और कमयुटेटर के घूमने पर यह कमयुटेटर पर फिसलता है|
  • ब्रूस कार्बन या ग्रेफाइट का बना होता है और इसका आकार आयताकार होता है|

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