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what is DC Generator in hindi | जनित्र

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DC Generator

“विद्युत जनरेटर एक ऐसी मशीन है जिसके द्वारा यांत्रिक ऊर्जा या शक्ति को विद्युत ऊर्जा या शक्ति में रूपांतरित किया जाता है|

चूंकि हम सब यह बात बहुत अच्छी तरह से जानते हैं कि आजकल कहीं भी अधिकतर AC मशीनों का ही प्रयोग किया जा रहा है परंतु फिर भी कुछ विशेष परिस्थितियों में डीसी मशीनों का प्रयोग किया जाता है| डीसी मशीनों का औद्योगिक क्षेत्रों में काफी महत्व है विशेषकर डीसी मोटर का क्योंकि डीसी मोटर एक ऐसी मशीन है जिस की गति को बहुत ही अच्छे प्रकार से नियंत्रित किया जा सकता है और इस प्रकार के नियंत्रण का लाभ हम किसी अन्य प्रकार के एसी मोटरों  में प्राप्त नहीं कर सकते|

क्या आप जानते हैं कि अब डीसी ऊर्जा या शक्ति का उत्पादन करने के लिए डीसी जनरेटर का प्रयोग पहले की तरह नहीं किया जाता क्योंकि-

  • अब डी सी उर्जा या शक्ति प्राप्त करने के लिए रेक्टिफायर का प्रयोग किया जाने लगा है|
  • रेक्टिफायर से डीसी ऊर्जा या शक्ति प्राप्त करने के लिए रेक्टिफायर को AC सप्लाई की आवश्यकता होती है|

चूंकि अब DC Generator का प्रयोग बहुत कम होता है इसलिए डीसी जनरेटर के बारे में हमें जानने की आवश्यकता नहीं पड़ती लेकिन डीसी मोटर की प्रक्रिया और प्रचालन को भली-भांति समझ में लिए हमें डीसी जनरेटर के बारे में बहुत ही विस्तृत जानकारी होनी चाहिए|

अतः इस अध्याय में हम DC Generator के बारे में विस्तार से जानने का प्रयास करेंगे|

  • विद्युत की प्रकृति के आधार पर जनेटर दो प्रकार के होते हैं|
  • एक ऐसी जनेटर और दूसरा डीसी जनेटर |
  • दोनों जनरेटर का कार्य यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करना है|
  • एसी जनरेटर, एसी पावर उत्पन्न करता है जबकि डीसी जरनेटर, डीसी पावर उत्पन्न करता है| इस प्रकार से दोनों ही  अंततः इलेक्ट्रिकल पावर उत्पन्न करते हैं|
  •  दोनों  ही Generator , Faraday’s law of electromagnetic induction  के सिद्धांत पर कार्य करते हैं |

जनन का सिद्धांत (Generator principle)

Faraday’s law of electromagnetic induction सिद्धांत के अनुसार-

“जब कोई चालाक किसी चुंबकीय क्षेत्र में गति करता है तो यह चालक फ्लक्सों  को काटता है जिससे उस चालक में विद्युत वाहक बल (emf) प्रेरित हो जाता है और यदि   परिपथ बंद (close circuit) रहता है तो इस चालक परिपथ में धारा प्रवाहित होने लगती है|”

  • प्रेरित विद्युत वाहक बल का मान चालक द्वारा काटे जाने वाले फ्लक्सों के परिवर्तन की दर  पर निर्भर करता है|
  • इस प्रेरित विद्युत वाहक बल की दिशा या विद्युत धारा (electric current) की दिशा फ्लेमिंग के दाएं हाथ के नियम के द्वारा ज्ञात किया जा सकता है|

फ्लेमिंग के दाएं हाथ के नियम..पढ़े 

डीसी मशीन में मुख्यतः दो पार्ट होते हैं-

  1. स्थिर पार्ट (stationary part) – डीसी मशीन में इसका निर्माण चुंबकीय क्षेत्र (magnetic field) उत्पन्न करने के लिए किया जाता है|
  2. घूर्णी पार्ट (rotatory part ) –
  • डीसी मशीन के इस पार्ट को आर्मेचर कहते हैं|
  • जनेटर के आर्मेचर में यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है|
  • मोटर के आर्मेचर  में विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है|

Types of DC Generator

डीसी जनरेटर (DC Generator) में चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करने के लिए स्थाई चुंबक (permanent magnet) की अपेक्षा सामान्यतः विद्युत चुंबक (electromagnet) का प्रयोग किया  जाता है|

  •  डीसी जनरेटर को स्टार्ट करने के लिए उसके विद्युत चुंबक (electromagnet) को  उत्तेजित (excite) करने की आवश्यकता होती है ताकि जनरेटर में चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न हो सके|

Note-छोटे आकार की डीसी मशीनों  में  चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करने के लिए स्थाई चुंबक का प्रयोग किया जाता है जबकि बड़े आकार के मशीनों में विद्युतचुंबक (Electromagnet) का प्रयोग करते हैं|

  • डीसी जनरेटर को स्टार्ट करने के लिए उसके विद्युत चुंबक (electromagnet) को अलग-अलग विधियों से  उत्तेजित (excite) किया  जाता है|
  • डीसी जनरेटर का लोड पर व्यवहार कैसा होगा, यह इस बात पर ही  निर्भर करता है कि इसे निम्न में से किस विधि से उत्तेजित किया गया है|

चुंबकीय क्षेत्र के उत्तेजन विधियो (excitation method) के आधार पर डीसी जनरेटर को दो भागो में वर्गीकृत किया गया है:

1.) Separately excited DC Generator  2.) self excited DC Generator

Separately excited DC Generator

वह डीसी जनरेटर  जिसके चुंबकीय क्षेत्र की बाइंडिंग को उत्तेजित करने के लिए किसी बाहरी और स्वतंत्र स्रोत (जैसे-बैटरी आदि) का प्रयोग किया जाता है|

  • इस प्रकार के  जनरेटर का प्रयोग बहुत ही कम किया जाता है|

 Self excited DC Generator

self excited DC Generator में इसके चुंबकीय क्षेत्र को उत्तेजित करने के लिए किसी बाहरी स्रोत की आवश्यकता नहीं पड़ती  बल्कि इस जनरेटर से प्राप्त होने वाली आउटपुट से ही क्षेत्र बाइंडिंग (Field winding) को सप्लाई प्राप्त हो जाती है|

  • सामान्यतः इसी प्रकार के डीसी जनरेटर का प्रयोग किया जाता है|

एक एनर्जी कनवर्टर के रूप में डीसी जनरेटर की दक्षता 100% नहीं होती अर्थात जनेटर को जितना इनपुट प्राप्त होता है उतना ही आउटपुट प्राप्त नहीं होता बल्कि इनपुट की अपेक्षा आउटपुट कम ही रहता है और यह इसलिए होता है क्योंकि इनपुट की गई संपूर्ण ऊर्जा का कुछ हिस्सा मशीन में ही व्यय हो जाता है|

 

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