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Magnetic Field in hindi | चुंबकीय क्षेत्र 

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चुंबकीय क्षेत्र  (Magnetic Field) 

जिस प्रकार किसी आवेशित पिंड के चारों ओर विधुत क्षेत्र (Electric Field) स्थापित हो जाता है ठीक उसी प्रकार  किसी चुंबक के चारों तरफ एक चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field) स्थापित हो जाता है |

यदि किसी चुंबक के किसी एक ध्रुव (Pole) को किसी दूसरे चुंबक के नजदीक ले जाते हैं तो दूसरा चुंबक कूलाम के नियम के अनुसार आकर्षण या प्रतिकर्षण बल (Attractive or Repulsive Force) का अनुभव करता है |

अतः

“किसी चुंबक के निकट के चारों ओर का वह क्षेत्र जिसमें एक चुंबक आकर्षण या प्रतिकर्षण बल का अनुभव करता है  ,चुंबकीय क्षेत्र  (Magnetic Field) कहलाता है  | “Magnetic Field definition in hindi | चुंबकीय क्षेत्र 

  • चुंबकीय क्षेत्र , चुंबक के निकट बहुत ही अधिक होता है परंतु जैसे-जैसे हम चुंबक से दूर जाते हैं , चुंबकीय क्षेत्र कम होता चला जाता है |
  • चुंबक के चारों ओर के चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field) को एक काल्पनिक रेखाओं से प्रदर्शित करते हैं |  जिसे चुंबकीय बल रेखा कहते हैं|
  • चुंबकीय क्षेत्र एक ऐसा क्षेत्र होता है जिसमें कोई अन्य पदार्थ जैसे निकिल लोहा आदि बल का अनुभव करते हैं|
  • चुंबकीय क्षेत्र को फैलने के लिए किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती| अतः यह निर्वात में भी विस्तारित हो सकता है|
  • ऊर्जा को स्टोर करने की क्षमता विधुत क्षेत्र (Electric Field)  की अपेक्षा चुंबकीय क्षेत्र में अधिक होती है|

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धारावाही चालक से उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field due to current carrying conductor)

हम सब जानते हैं कि ” जब आवेश स्थिर अवस्था में होता है तो उसके चारों तरफ विद्युत क्षेत्र स्थापित हो जाता है लेकिन जब वह आवेश किसी वेग से गति करने लगता है तो उसके चारों तरफ विद्युत क्षेत्र के साथ-साथ चुंबकीय क्षेत्र भी स्थापित हो जाता है|”

यदि इस बात को उदाहरण से समझे तो-

जब किसी चालक में विद्युत धारा (Electric current) प्रवाहित हो रही होती है तो उस चालक के चारों तरफ चुंबकीय क्षेत्र स्थापित हो जाता है| क्योंकि चालक में धारा का प्रवाह आवेश के प्रवाह के कारण ही हो रहा है|

  • चालक में विद्युत धारा (Electric current) के प्रवाह के कारण उत्पन्न हो रहे चुंबकीय क्षेत्र की दिशा दाएं-हाथ के स्क्रू नियम या दाएं हाथ के नियम से ज्ञात की जा सकता है|
  • धारावाही चालक से उत्पन्न हो रही “चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field)” की दिशा और चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता चालक में प्रवाहित होने वाली धारा पर निर्भर करती है|

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