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n-type and p-type semiconductor in hindi

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n-type and p-type semiconductor kya hai

आज के अध्याय में हम n- टाइप अर्धचालक और p-टाइप अर्धचालक (n-type and p-type semiconductor) के बारे में विस्तार से जानेंगे|

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किसी शुद्ध अर्धचालक (Pure Semiconductor) में डोपिंग अर्थात अशुद्धियां (Impurities) मिलाने का मुख्य उद्देश्य अर्धचालक की चालकता (Conductance) को बढ़ाना है और यह तभी संभव है जब हम अर्धचालक में उपस्थित मुक्त इलेक्ट्रानओं (Free electrons) या होल्स की संख्या में किसी प्रकार से वृद्धि कर दें|

आप तो जानते ही हैं कि अर्धचालक के परमाणु के सबसे अंतिम कोष में चार इलेक्ट्रान होते हैं जिन्हें कि हम संयोजक इलेक्ट्रॉन (Valence electron) कहते हैं और यह इलेक्ट्रान किसी दूसरे परमाणु से बंध (bond) बनाते हैं|

अर्धचालक में दो प्रकार की अशुद्धियां मिलाई जाती हैं| पहली जो पंचसंयोजक (Pentavalent) होती है और दूसरी जो त्रिसंयोजक (trivalent) होती है|

जब अर्धचालक में पंचसंयोजक अशुद्धि (Pentavalent impurity) मिलाई जाती है तो अर्धचालक में बहुत ही अधिक संख्या में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की उत्पत्ति होती है और त्रिसंयोजक अशुद्धि (trivalent impurity) मिलाते हैं तो ऐसी अवस्था अर्धचालक में बहुत ही अधिक संख्या में होल्स का निर्माण होता है|

अर्धचालक में मिलाए जाने वाले अशुद्धि के आधार पर अर्धचालक निम्नलिखित दो प्रकार के होते हैं-

n-type semiconductor in hindi

जब किसी शुद्ध अर्धचालक में थोड़ी मात्रा में  पंचसंयोजक अशुद्धि (Pentavalent impurity) मिलाई जाती है तो अर्धचालक में बहुत ही अधिक संख्या में मुक्त इलेक्ट्रॉनों उपलब्ध हो जाते हैं, ऐसे अर्धचालक को n-टाइप अर्धचालक (n-type semiconductor) कहते हैं|

  • जिन अशुद्धि को अर्धचालक में मिलाने से मुक्त इलेक्ट्रॉनों की अधिकता हो जाती है, ऐसी अशुद्धि को दाता अशुद्धि (Donor impurity) कहते हैं| क्योंकि ऐसे तत्व और अधिक इलेक्ट्रॉन देते हैं या उपलब्ध करवाते हैं|
  • अर्धचालक बनाने के लिए अशुद्धि के रूप में सामान्यता आर्सेनिक जिसका परमाणु क्रमांक 33 और संयोजक इलेक्ट्रॉन 5 तथा एंटीमनी जिसका परमाणु क्रमांक 51 और संयोजक इलेक्ट्रॉन 5 होता है, प्रयोग किया जाता है|n-type and p-type semiconductor in hindi

अब यहां पर हम अर्धचालक में मुक्त इलेक्ट्रॉन के बनने की क्रिया को विस्तार से समझते हैं| मान लीजिए एक पंचसंयोजक अशुद्धि (Pentavalent impurity) जैसे आर्सेनिक लेते हैं और शुद्ध अर्धचालक जैसे सिलिकॉन में इसकी डोपिंग करते हैं, तो क्या होगा| एक आर्सेनिक परमाणु के 5 संयोजक इलेक्ट्रॉन मैं से चार संयोजक इलेक्ट्रॉन सिलिकॉन के 4 परमाणु के साथ संयोजक बंध बना लेते हैं लेकिन आर्सेनिक का 1 इलेक्ट्रॉन किसी से कोई बंध नहीं बनाता और यही 1 इलेक्ट्रॉन मुक्त इलेक्ट्रॉन का रूप ले लेता है जो कि किसी परमाणु से नहीं जुड़ता| क्योंकि हम बहुत कम मात्रा में अशुद्धि के रूप में बहुत ही अधिक संख्या में आर्सेनिक के परमाणु डालते हैं जो कि बहुत ही अधिक संख्या में मुक्त इलेक्ट्रान उपलब्ध कराता है|

  • इस प्रकार के अर्धचालक में विद्युत धारा का चालन मुक्त इलेक्ट्रॉन अर्थात ऋणात्मक आवेश (negative charge) के कारण होता है इसलिए इसे n-टाइप अर्धचालक कहते हैं|

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p-type semiconductor in hindi

जब किसी शुद्ध अर्धचालक में थोड़ी मात्रा में  त्रिसंयोजक अशुद्धि मिलाई जाती है तो अर्धचालक में बहुत ही अधिक संख्या में होल्स उपलब्ध हो जाते हैं, ऐसे अर्धचालक को p-टाइप अर्धचालक कहते हैं|

  • जिन अशुद्धि को अर्धचालक में मिलाने से होल्स की अधिकता हो जाती है, ऐसी अशुद्धि को ग्राहक अशुद्धि कहते हैं क्योंकि ऐसे तत्व और अधिक होल्स उपलब्ध करवाते हैं|
  • अर्धचालक बनाने के लिए अशुद्धि के रूप में सामान्यता गैलियम जिसका परमाणु क्रमांक 31 और संयोजक इलेक्ट्रॉन 3 तथा इन्डियम जिसका परमाणु क्रमांक 49 और संयोजक इलेक्ट्रॉन 3 होता है, प्रयोग किया जाता है|

n-type and p-type semiconductor in hindi

अब यहां पर हम अर्धचालक में होल्स के बनने की क्रिया को विस्तार से समझते हैं| मान लीजिए एक त्रिसंयोजक अशुद्धि जैसे गैलियम लेते हैं और शुद्ध अर्धचालक जैसे सिलिकॉन में इसकी डोपिंग करते हैं, तो क्या होगा| एक आर्सेनिक परमाणु के 3 संयोजक इलेक्ट्रॉन सिलिकॉन के 3 परमाणु के साथ संयोजक बंध बना लेते हैं लेकिन गैलियम का 1 बंध नहीं बनता जिससे यह खाली रह जाता है और यही 1 खाली बंध होल्स का रूप ले लेता हैं |

  • चूंकि हम बहुत कम मात्रा में अशुद्धि के रूप में बहुत ही अधिक संख्या में गैलियम के परमाणु डालते हैं जो कि बहुत ही अधिक संख्या में होल्स उपलब्ध कराता है|
  • इस प्रकार के अर्धचालक में विद्युत धारा का चालन होल्स अर्थात धनात्मक आवेश (positive charge) के कारण होता है इसलिए इसे p-अर्धचालक कहते हैं|

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