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what is Semiconductor in hindi

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आज के लेक्चर में हम अर्धचालक (Semiconductor in hindi) के सम्बन्ध में निम्नलिखित बिन्दुओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे |

  1. What is semiconductor in Hindi (अर्धचालक क्या है?)
  2. Effect of temperature on Semiconductor in Hindi (अर्धचालक पर तापमान का प्रभाव)
  3. Properties of semiconductor in Hindi  (अर्धचालक के विशेष गुण) 
  4. Types of conductor in Hindi (अर्धचालक के प्रकार )

What is semiconductor in Hindi (अर्धचालक क्या है?)


Semiconductor and Types of semiconductor in hindi

वैसे तो आप जानते ही हैं की विद्युत चालक एक ऐसा ठोस पदार्थ है जिससे कि विद्युत धारा सरलता से प्रवाहित हो सकती है और विद्युत रोधक एक ऐसा ठोस पदार्थ है जो कि विद्युत धारा को स्वयं से प्रवाहित होने नहीं देता है अर्थात वह विद्युत धारा के प्रवाह का विरोध करता है। परंतु प्रकृति में कुछ ऐसे भी पदार्थ है जैसे-जर्मेनियम, सिलिकॉन, कार्बन इत्यादि जो कि ना तो एक अच्छा चालक ही है और ना ही विद्युत रोधक ही है
अतः कुछ ऐसे भी पदार्थ है जिनकी विद्युत चालकता विद्युतचालक से कम लेकिन विद्युतरोधक से अधिक होती है| यह चालकता सप्लाई किए जाने वाले वोल्टेज या करंट पर निर्भर करती है।
यदि दूसरे शब्दों में कहें तो “अर्धचालक ऐसा पदार्थ हैं जिनका प्रतिरोध ,विद्युत चालक और विद्युतरोधक के बीच होता है।”
  • अर्धचालक के विशेष गुण के कारण ही आज के समय में इलेक्ट्रॉनिक परिपथों में व्यापक स्तर पर इनका प्रयोग किया जा रहा है|

होल्स क्या है?

किसी भी अर्धचालक में विद्युत धारा का प्रवाह दो कारणों से संभव हो पाता है| एक मुक्त इलेक्ट्रॉन के प्रवाह के कारण तथा दूसरा होल्स अर्थात छिद्र के प्रवाह के कारण| वैसे तो किसी शुद्ध अर्धचालक में सामान्य अवस्था पर मुक्त इलेक्ट्रॉन या होल्स नहीं होते हैं लेकिन जैसे ही अर्धचालक पर वोल्टेज प्रयुक्त किया जाता है वैसे ही उधर चालक के संयोजक बंध  टूट जाते हैं जिससे मुक्त इलेक्ट्रॉन और होल्स उपलब्ध हो जाते हैं|

  • अर्धचालक में मुक्त इलेक्ट्रॉन उपलब्ध हो जाने के कारण विद्युत धारा प्रवाहित होने लगती है और उसी समय होल्स के कारण भी अर्धचालक में विद्युत धारा प्रवाहित होती है|
  • संभवतः आप सोच रहे होंगे कि ये  होल्स क्या होता है? जब उष्मीय ऊर्जा के कारण अर्धचालक में संयोजक-बंध टूटता है तो मुक्त इलेक्ट्रॉन द्वारा अपना स्थान छोड़कर चले जाने के कारण उसका स्थान खाली हो जाता है, वह खाली स्थान ही होल्स अर्थात छिद्र कहलाता है|
  • अर्धचालक में उष्मीय ऊर्जा के कारण मुक्त इलेक्ट्रॉन-होल्स के जोड़े का निर्माण होता है|

Properties of semiconductor in Hindi (अर्धचालक के विशेष गुण)

  1. अर्धचालक, संयोजक बंध से बनाना होता है|
  2. किसी भी अर्धचालक का प्रतिरोध विद्युत रोधक से कम परंतु विद्युतचालक से अधिक होता है|
  3. अर्धचालक का प्रतिरोध ताप गुणांक ऋणात्मक होता है जिसका अर्थ यह होता है कि अर्धचालक का तापमान बढ़ता है तो इसका प्रतिरोध घटता है और जब तापमान घटता है तो प्रतिरोध बढ़ता है| जैसे कि सिलिकॉन निम्न तापमान पर विद्युतरोधक की भांति कार्य करता है परंतु यदि उसका तापमान बढ़ाते जाते हैं तो यह धीरे धीरे विद्युत चालक की भांति कार्य करने लगता है|
  4. जब किसी अर्धचालक में अशुद्धि के रूप में आर्सेनिक या गैलियन इत्यादि डाल देते हैं तो अर्धचालक के विद्युत धारा चालन के गुण में कुछ वृद्धि हो जाती है|

Effect of temperature on semiconductors in Hindi

जब कोई अर्धचालक सामान्य तापमान पर रखा होता है तो वह एक कुचालक की भांति कार्य करता है मतलब इसमें किसी प्रकार के कोई मुक्त इलेक्ट्रॉन नहीं होते हैं जिससे कि चालक की चालकता शून्य होती है| परंतु जब अर्धचालक का तापमान बढ़ता है तो अर्धचालक के कुछ संयोजक बंध ऊष्मा ऊर्जा के कारण टूटने लगता है जिसके कारण लाभ यह  होता है कि बहुत ही अधिक मात्रा में मुक्त इलेक्ट्रॉन उपलब्ध हो जाते हैं| इन मुक्त इलेक्ट्रॉन के कारण जब अर्धचालक पर विद्युत विभवांतर अप्लाई किया जाता है तो कम मात्रा में विद्युत धारा प्रवाहित होने लगती है|

  • ऊपर के विवरण से यह स्पष्ट होता है कि किसी अर्धचालक का तापमान बढ़ाने पर उसके चालकता में वृद्धि और प्रतिरोध में कमी होती है|
  • सामान्य तापमान पर अर्धचालक पर वोल्टेज प्रयुक्त किया जाता है दो अर्धचालक से बहुत ही कम विद्युत धारा प्रवाहित होती है|

Types of semiconductor in hindi

निम्नलिखित प्रकार के अर्धचालक होते हैं-

Intrinsic semiconductor in hindi

ऐसे अर्धचालक प्रदार्थ जो कि बिल्कुल शुद्ध होते हैं अर्थात जिनमे किसी प्रकार की कोई अशुद्धियाँ या अपद्रव्य नही मिला होता है, निज अर्धचालक (Intrinsic Semiconductor)  कहलाता हैं |

  • ऐसे अर्धचालक पर वोल्टेज प्रयुक्त करने पर विद्युत क्षेत्र के प्रभाव के कारण इसमें उपस्थित मुक्त इलेक्ट्रॉन और होल्स प्रवाहित होने लगते हैं| इसमेंविद्युत धारा का प्रवाह मुक्त इलेक्ट्रान और होल्स दोनों के कारण होता है| इसलिए अर्धचालक में कुल विद्युत धारा मुक्त इलेक्ट्रॉन और होल्स के कारण उत्पन्न विद्युत धारा का योगफल है|

Extrinsic Semiconductor in hindi

जब किसी अर्धचालक में अशुद्धि के रूप में आर्सेनिक या गैलियन इत्यादि डाल देते हैं तो ऐसे निर्मित अर्धचालक वाह्य-अर्धचालक  कहते हैं |

  • क्या आप जानते हैं कि डोपिंग क्या है? किसी अर्धचालक में उपयुक्त अशुद्धि को कम मात्रा में  जोड़ने की प्रक्रिया को डोपिंग कहते हैं |
  • शुद्ध अर्धचालक की डोपिंग कर देने से उसकी चालकता में वृद्धि हो जाती है|
  • किसी शुद्ध अर्धचालक में अशुद्धि की डोपिंग जैसे कि अशुद्धि की मात्रा और प्रकार को बहुत ही बहुत ही नियंत्रित तरीके से करनी होती है| सामान्यता अर्धचालक के प्रत्येक 10^8 परमाणु के लिए अशुद्धि का 1 परमाणु जोड़ा जाता है|

अर्धचालक में मिलाए गए अशुद्धि के प्रकार के आधार पर वाह्य-अर्धचालक निम्नलिखित दो प्रकार के होते हैं-

  1. p-type semiconductor  
  2. n-type semiconductor

 

What is semiconductor quiz

ये भी पढ़ें – n-type and p-type semiconductor

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